Thursday, July 17, 2014

Journey to 'God's Own Land' Kerala .... सड़क यात्रा ब्‍यौरा 1....


बि‍लासपुर-केरल-बि‍लासपुर यात्रा संस्‍मरण 
दि‍नांक 17.05.2014 से 28.05.2014 

A Desire fulfilled with our Dezire
यात्रा पथ

प्रथम दि‍वस 17.5.2014     बि‍लासपुर - कामारेड्डी

पहला दि‍न....सफर बि‍लासपुर से कामारेड्डी तक....
सफरनामा....  
पिछले साल अपने वि‍वाह की 25वीं वर्षगांठ पर 2013 जून में स्वयं की गाड़ी से नेपाल यात्रा के दौरान आने वाले वर्ष में सड़क मार्ग से केरल यात्रा की योजना पर मोहर लग गई। ऐसा हम हर यात्रा में करते हैं, अगली यात्रा की रूपरेखा बनाना। हालांकि पिछले कई वर्षों से स्वयं की गाड़ी से केरल यात्रा एक सुखद सपना रही थी। वर्ष में दो बार जून और दिसंबर में पर्यटन अब आदत सी बन चुकी थी। पर इस वर्ष परिस्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि ठंड में कहीं जाना नहीं हो पाया। तब ये निश्‍चि‍त हुआ कि जून की छुट्टियों में ‘God's own Land’ की यात्रा को मूर्त रूप दिया जाए। तय ये भी हुआ कि ड्रायवर नहीं रखेंगे....कुल जमा हम दो प्राणी पति-पत्‍नी ही साथ रहेंगे.....राजेश टंडन-संज्ञा टंडन.....तभी तो एडवेंचर है। वैसे उम्र का तकाज़ा इस बात की इजाज़त नहीं देता था कि‍ महज हम दो बि‍ना पूरी तैयारी और योजना के हज़ारों कि‍मी की यात्रा पर नि‍कल पड़ें....पर क्‍या करें.....हम ऐसे ही हैं। 15 मई की रात 17 मई को यात्रा पर निकलना तय हुआ। छुटपुट तैयारियों के पश्चात् 17 तारीख को सुबह 7 बजे अपनी मारुति डिज़ायर में बिलासपुर से हम केरल यात्रा पर निकल पड़े। रायपुर-भि‍लाई पहुंचने तक हम इस बात पर सहमत हो गए कि‍ चूंकि‍ अगले कई दि‍नों तक यात्रा करनी है तो स्‍वास्‍थ्‍य पर ध्‍यान देना होगा, इसलि‍ये दि‍न का खाना स्‍कि‍प करने की कोशि‍श करेंगे, जूस, सूप और हल्‍का-फुल्‍का खाते यात्रा जारी रखेंगे और मूली तो हरगि‍ज नहीं खाएंगे....पर इसका मतलब ये नहीं नि‍कालें कि हम पेट काट के यात्रा कर रहे थे। यह तय हुआ रात 8.30-9.30 बजे के बाद कि‍सी भी परि‍स्‍थि‍ति‍ में यात्रा जारी नहीं रखी जाएगी। यह 'भी' तय हुआ कि कि‍सी भी सूरत-ए-हाल हम लड़ाई-झगड़ा, बहस, व्‍यंग्‍य-कटाक्ष, नोच-खसोट आदि‍ नहीं कर यात्रा का आनंद लेते रहेंगे। उत्‍साह, उमंग, जोश, खरोश, इरादा, वि‍श्‍वास, लता-रफी-कि‍शोर के गीत और रफ्तार.....रात तक हैदराबाद पहुंचने का लक्ष्य रखा, पर भि‍लाई में डेढ़-दो घंटे और इतना ही वक्त नागपुर-हैदराबाद रोड बीच में खराब होने के कारण हैदराबाद से 80 कि.मी. पहले 8.30 मिनट पर हमने कामारेड्डी में ही रुकना सही समझा। 700-800 कि.मी. की थकान होटल पहुंचते ही दूर हो गई। सिर्फ रात में रुकना है और सुबह 7.30 बजे निकल जाना है यह जानकर होटल वालों ने 2200 का कमरा 1000 में दे दिया। साफ-सुथरा होटल और कमरा, साथ ही बेहतरीन रूम सर्विस और अच्छा खाना.....और क्‍या चाहि‍ये.....तबियत हरी हो गई।

तस्‍वीर-ए-बयां
'यात्रा के पहले दो दि‍न तस्‍वीरें खींचने का न वक्‍त था न माहौल' infact हमारा पूरा ध्‍यान योजना बनाने में ही लगा रहा, हालांकि रास्‍ते में कई तस्‍वीर खींचने लायक जगहें दीखीं, चूकने के लि‍ये सॉरी' 
नागपुर-हैदराबाद मार्ग
समय बचत...कार में लंच
चमचमाती शानदार सड़क
उफ... हर 35 से 40 कि‍मी पर एक टोल  
हैदराबाद में भाभी, भतीजी और दामाद के साथ
                                     

कल पढि़ये यात्रा ब्‍यौरा क्रमांक 2...सफरनामा... कामारेड्डी-बैंगलोर
........हालांकि बैंगलोर से पहले एक गाड़ी में 4-5 अराजक उपद्रवी लोगों ने आगे पीछे चल रहे लोगों से उदण्डता की कोशि‍श की, लेकिन उन्हें संस्कृत में समझा दिया गया......

6 comments:

  1. @ कि‍सी भी सूरत-ए-हाल हम लड़ाई-झगड़ा, बहस, व्‍यंग्‍य-कटाक्ष, नोच-खसोट आदि‍ नहीं कर यात्रा का आनंद लेते रहेंगे।

    इतने दिनों में तो फ़्रेंड्स के बीच जूतम पैजार हो जाती है। मुझे भी यही देखना है कि आगे क्या हुआ ? :)

    @एक गाड़ी में 4-5 अराजक उपद्रवी लोगों ने आगे पीछे चल रहे लोगों से उदण्डता की कोशि‍श की, लेकिन उन्हें संस्कृत में समझा दिया गया......

    वह कौन सी संस्कृत थी, जो उन्हें समझ आ गया। :)

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  2. बहुत बढिया यात्रा संसमरण ...
    हा हा हा हा ...... वह कौन सी संस्कृत थी, जो उन्हें समझ आ गया। :)

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  3. It could not have been better,it has ignited hunger for the next part and thank you for making us people, who do not venture out of their homes but want to live adventures like yourself, to think again and push ourselves out of the safety of our homes and get out and live life - like you. Thanks once again.

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  4. संज्ञा जी, वो कौनसी तकनीक अपनाई कि आप लोगों में इतना उत्साह भर आया। मैं व्यक्तिगत तौर पर राजेश जी कि हिम्मत कि दाद देना चाहूँगा.......
    आशा है, आगे ये सफरनामा और भी रोचक होगा......
    इंतज़ार है.......

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  5. KUCHHA LOG SANSKRUT SAMAJHA HI LETE HAIN...MAGAR KOI CHARA BHI NAHIN NA NA SAMAJHANE KA...

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